बारबार पूछे जाने वाले प्रश्न

निकोलास नेगरोपोंते ,ओअलपीसी के अध्यक्ष ,इस विषय के प्रश्नों का उत्तर देते हुए ।

$१०० का लेपटोप वास्तव में क्या है ?
बनाए जाने वाला यंत्र लीन्कस पर अधारित है जिसमें दो प्रकार के प्रर्दशन है : एक पूर्ण रंगीन ,टराणस्मिसिव डीवीडी मोढ़ तथा दूसरा काला व सफेद प्रतिविम्बित और ३x उसकी रेसल्यूषण पर धूप में पढ़ा जाने योग्य है । इस लेपटोप में ५०० मेगा ह्रटस्स का प्रोसेस्र ,१२८ मेगा एमबी की डीरेम और ५०० मेगा एमबी की फलाश मेमरी है । इसमें हार्ड डिस्क नहीं होगी परंतु चार यूस्बी पोर्टस होगें । लेपटोप में वायरलस ब्रोड बैन्ड है जो उसे एक मेंष नेटवर्क की तरह काम करने की अनुमति देता है । हर एक लेपटोप अपनें पड़ौसी लेपटोप से बातचीत कर पाएगा जिसें एक ऐंडहोक लोकल ऐरीया नेटवर्क बन जाएगा । लेपटोप नई तकनीक की शक्ति से बना है जिसमें वाइनढप भी है । यह लेपटोप लगभग सब कुछ कर पाएगा परंतु यह बहुत ज्यादा डेटा जमा नहीं कर पाएगा ।

विकास के मार्ग पर चल रहे देशों के बच्चों को लेपटोप की क्या आवश्यकता है ?
लेपटोप खिड़की तथा औज़ार दोनों है ,खिड़की संसार को देखने के लिए तथा एक औज़ार जिसके द्वारा सोचा जा सके । यह बच्चों के लिए एक बहुत अच्छा माध्यम है जिसके द्वारा वह अपने आप बातचीत करके तथा खोज़ करके सीख सके ।

क्यों न एक डेक्स्टोप कम्प्यूटर ,अथवा अधिक बेहतर रीसाईकल्ड डेक्स्टोप यंत्र ?


इतनी कम कीमत कैसे संभव है ?


हर बच्चे के पास कम्प्यूटर होना क्यों ज़रुरी है ? समाजिक केन्द्र जहाँ ये उपलब्ध है उनमें क्या कमी है ?
कोई भी समाजिक पैन्सीलों के बारे में नहीं सोचता , बच्चों के पास अपनी पैन्सील होती है । ये औज़ार है जिनके द्वारा सोचा जा सके , कम कीमत के है ताकि काम , खेलने, चित्रकला , लिखने तथा गणित सीखने के लिए इस्तमाल किया जा सकें । इसके अलावा कई कारण है जो बच्चें के लिए अपनी चीज़ होने की आवश्यकता बताते है : जैसे फुटबाल ,गुड़िया , पुस्तक जो वे प्यार और देखबाल से रखे ।

क्नेंक्टीविटी के बारे में क्या ? क्या टेलीकम्यूनिकेश्न सेवाएँ विकास के मार्ग पर चल रहें देशों के लिए महँगी नहीं होती ?
जब ये यंत्र डिब्बे से बाहर निकलेगें तो वह अपने आप और एक दूसरे से मेंश नेटवर्क बना लेगें । यह चीज़ पहले एम्आइटी और मीडिया लाँब में बनाई गई थी । हम नए तरीके खोज रहे है जो इसे इन्टरणॅट की रीढ़ से कम कीमत में जोड़ दे ।


ज्यादा नहीं । योजना यह है की $ १०० का लेपटोप सब कुछ कर पाए । वह केवल बहुत ज्यादा डेटा जमा नहीं कर पाएगा ।

इसकी बिकरी कैसे की जाएगी ?
ये लेपटोपस सरकारों को बेचे जाएगें और पाठशाला में पढ़ने वाले छात्रों को एक लेपटोप प्रति बच्चा के आधार पर दिए जाएगें । चीन, भारत ,ब्राज़ील ,अर्जनटीना ,इजिप्ट ,नाइजीरीया और थाइलेंड में शुरु की बातचीत हो चुकी है । अलग से ठीक ठाक गिन्ती में यंत्रों को दूसरे देशों की विकास पर चलने वाले समुदायों को दिया जाएगा । इस यंत्र का बैचा जाने वाला मोडल साथ साथ सोचा जाएगा ।

हम इन लेपटोप की बाज़ार में आने की अपेक्षा कब तक कर सकते है ? सबसे बड़ी समस्याएँ क्या है ?
हमारी कोशिश हैं की ये लेपटोपस २००६ के आखिर या २००७ की शुरुआत में बीकरी के लिए उपलब्ध होगें ।उत्पादन तब शुरु होगा जब ५ से १० मिल्यन लेपटोपस की माँग अथवा भुगतान हो चुका होगा। सबसे बड़ी समस्या होगी १०० मिल्यन लेपटोपस बनाना। यह केवल आपूर्ति करने की समस्या नहीं परंतु अभिकल्प करने की भी है । यह पेमाना भयभीत कर देने वाला भी है परंतु में आश्चर्य चकित हूँ कि हमें कुछ कम्पनियाँ क्या प्रस्ताव कर रही है । ऐसा लगता है कि आधी समस्याऐं मात्र मन में ठान लेने से सुलझ जाएगी ।

इस $ १०० के लेपटोप का असली अभिकल्प का उत्पाद करने वाला कौन है ?
ताइवान की क्वानटा कम्प्यूटर इंक को इस $ १०० के लेपटोप के असली अभिकल्प के उत्पाद के लिए चुना गया है । यह फैसला ओअलपीसी संस्था द्वारा बहुत कम्पनीयों के बोली लगाए जाने पर लिया गया है । क्वानटा कम्प्यूटर इंक ताइवान में १९८८ में स्थापित की गई थी । १० बिल्यन अमेरिकी डॉलर की बिकरी हो जाने के बाद क्वानटा लेपटोपस पीसीस के उत्पादन में पूर्ण संसार में सबसे बड़ी कम्पनी है । यह कम्पनी मोबाइल फौन ,एल्सीडी टीवी ,सरवर और स्टोरेज़ प्रोडग्ट का उत्पादन भी करती है । इसके अलावा क्वानटा ने अभिनव एक नया $२०० मिल्यन का आर न डी सैन्टर २००५ के क्यू ३ में खोला है जिसमें २.२ मिल्यन स्कूएर फीट की फर्श की जगह है और ७००० इन्जीनियर के काम करने की जगह है ।

यह योजना कैसे चलाए जाएगी ?